सत्य, यह एक ऐसा तथ्य जिसमें बड़े-बड़े ज्ञानी भी भ्रमित हो जाते हैं, जीवन का आरम्भ क्यों होता है और उसका अंत क्यों होता है अर्थात मृत्यु क्यों होती है, इसी तथ्य को जानना सांसारिक सत्य है, संसार के सभी धर्म इसी सत्य को जानने का प्रयास कर रहें हैं - भौतिक स्तर पर हमें जीवन-मृत्यु और जीवन चक्र ही सत्य प्रतीत होता है परन्तु आध्यात्मिक स्तर पर सत्य जीवन - मृत्यु से परे की वस्तु है जिसे केवल अनुभव किया जा सकता है, सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में केवल हम पदार्थ (भिन्न-भिन्न अवस्थाओं में) और ऊर्जा को ही प्रत्यक्ष रूप से और परोक्ष रूप से भी अनुभव करते हैं, परन्तु इस पदार्थ और ऊर्जा का नियंता, कारण कौन है, मेरे मत से वही कारण ही सत्य है ! आइये इस प्रार्थना से आरम्भ करते हुए मेरे साथ चलिए उस सत्य की खोज में -
ॐ असतो मा सद्गमय | तमसो मा ज्योतिर्गमय ||
मृत्योर्मामृतं गमय || ॐ शांति: ! शांति: ! शांति: !!!


20/03/2011

होरी खेलत संत सुजान, आत्मज्ञान से


आत्मज्ञान से, होरी खेलत संत सुजान, आत्मज्ञान से 
छिन छिन पल पल घड़ि घड़ि होरी निशिदिन आठों जाम से 
होरी खेलत संत सुजान, आत्मज्ञान से ।। (२)


पंडित खेलै पोथी पत्रा से, मुल्ला किताब कुरान से,
जोगी खेले जोग जुगत से, अभिमानी खेलै अभिमान से ।
होरी खेलत संत सुजान, आत्मज्ञान से 

छिन छिन पल पल घड़ि घड़ि होरी निशिदिन आठों जाम से 
होरी खेलत संत सुजान, आत्मज्ञान से ।। (२)



कामी खेलै कामिनि के संग, लोभी खेलत दाम से,
पतिव्रता खेलै अपने पति संग, वैश्या सकल जहान से ।

होरी खेलत संत सुजान, आत्मज्ञान से 
छिन छिन पल पल घड़ि घड़ि होरी निशिदिन आठों जाम से 
होरी खेलत संत सुजान, आत्मज्ञान से ।। (२)



अति प्रचंड तेज माया को, तकि तकि मारत बान से,
कोटिन माहि बचे कोई बिरला, कहे कबीर गुरु ग्यान से ।

होरी खेलत संत सुजान, आत्मज्ञान से 
छिन छिन पल पल घड़ि घड़ि होरी निशिदिन आठों जाम से 
होरी खेलत संत सुजान, आत्मज्ञान से ।। (२)


1 टिप्पणी:

  1. बहुत सुंदर बातें ..... होली की शुभकामनायें आपको भी.....

    उत्तर देंहटाएं

सत्य के महासाधक को समर्पित



यदि संसार के सभी पेड़ कलम होते और समुद्र स्याही होते और इस तरह सात समुद्र स्याही की पूर्ति करने के लिए होते, तो भी लिखते-लिखते अल्लाह के शब्द समाप्त न होते !!
(कुरान, अध्याय ३१, पद ११)

Follow by Email